
कुछ तूफ़ान ऐसे होते हैं,
जिन्हें तबाही से भी कोई मतलब नहीं होता..
जिसे काट के फेंक सकती नहीं
और पला जा नहीं सकता ,
जिसे देखने की हिम्मत नहीं
और सहा जा नहीं सकता ,
भूल सकती नहीं कभी...
पर इतनी गैरत तो है..
,की याद किया जा नहीं सकता !
......
गाहे बगाहे मेरी ज़िन्दगी के किस्से जुड़े हैं तुझसे कुछ इस कदर
की सब तब अलग होगा जब मैं खुद अपनी ज़िन्दगी से....
इसलिए तेरी मौत भी शायद तसल्ली न दे मुझे..
अब बस अपनी मौत का इंतज़ार है !
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें