शुक्रवार, 18 मई 2012

"नासूर"


कुछ तूफ़ान ऐसे होते हैं,
जिन्हें तबाही से भी कोई मतलब नहीं  होता.. 

तू मेरी ज़िन्दगी का  वो  नासूर है.....

जिसे काट के फेंक सकती नहीं 
और पला जा  नहीं  सकता ,
जिसे देखने की हिम्मत नहीं 
और सहा जा नहीं सकता , 
भूल सकती नहीं कभी...
पर इतनी गैरत तो है..
         ,की याद किया जा नहीं सकता !
         ......
गाहे बगाहे मेरी ज़िन्दगी के किस्से जुड़े हैं तुझसे कुछ इस कदर 
की सब तब अलग होगा जब मैं खुद अपनी ज़िन्दगी से....
इसलिए तेरी मौत भी शायद तसल्ली न दे मुझे..
अब बस अपनी मौत का इंतज़ार है !

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