मंगलवार, 22 मई 2012


बचपन  से  ही ....
बड़ी  तमन्ना  थी  ज़िन्दगी  जीने  की ..
हमेशा  सोचती  थी  वो,  की उसकी ज़िन्दगी  ऐसे  ही नहीं जाएगी ..
सब  कुछ ,    कुछ  अलग  सा  होगा...!
सपनों  सा.. सुन्दर  और  अनोखा  !

सब  कुछ  अलग  सा  हुआ   भी..  पर  उसकी  सपनों  की  दुनिया  से  पूरा अलग !!

उसने  कभी  नही  सोचा  की  उसे  चाँद  चाहिए था !
                        पर
उसका  अपना  अलग  ही  आसमान  था !!!!!!
..............
हर  सुबह  की  पहली  किरण  को  देखने  का  दिल  करता  था ...
ढलती  हुई  शाम  को  मुटठी  में  भर  महसूस  करने  का  दिल  करता  था.......
हर  बारिश  में  भीगते  हुए  दूर  तक  जाने  का  दिल  करता  था ..
ठण्ड  में  कोहरे  की  चादर  ओढ़  के  मुसकराने  का  दिल  करता  था ..
बहुत  अलग  नही  था  वो  आसमान !
बस  क्षितिज  को  गले  लगाने  का  दिल  करता  था !!!



शुक्रवार, 18 मई 2012

"नासूर"


कुछ तूफ़ान ऐसे होते हैं,
जिन्हें तबाही से भी कोई मतलब नहीं  होता.. 

तू मेरी ज़िन्दगी का  वो  नासूर है.....

जिसे काट के फेंक सकती नहीं 
और पला जा  नहीं  सकता ,
जिसे देखने की हिम्मत नहीं 
और सहा जा नहीं सकता , 
भूल सकती नहीं कभी...
पर इतनी गैरत तो है..
         ,की याद किया जा नहीं सकता !
         ......
गाहे बगाहे मेरी ज़िन्दगी के किस्से जुड़े हैं तुझसे कुछ इस कदर 
की सब तब अलग होगा जब मैं खुद अपनी ज़िन्दगी से....
इसलिए तेरी मौत भी शायद तसल्ली न दे मुझे..
अब बस अपनी मौत का इंतज़ार है !

Ufff...

Sapne bhi aankhon se kya aise jalte hain.....


  Raakh tak ka jamin pe nisha nhi hota....